नई दिल्ली
2016 में वसंत कुंज स्थित रायन इंटरनैशनल स्कूल में 6 साल के एक बच्चे की मौत के मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और 5 अन्य को दिल्ली की एक अदालत ने गैरइरादतन हत्या का आरोपी माना है जिसमें 10 साल जेल की सजा हो सकती है। जनवरी 2016 में देवांश नाम के बच्चे की स्कूल के वॉटर टैंक में डूबने से मौत हो गई थी। मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अंबिका सिंह ने केस के तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करते हुए कहा कि स्कूल के अंदर वॉटर टैंक था, जहां बच्चे आसानी से पहुंच सकते थे।
टैंक के आसपास किसी को तैनात नहीं किया गया था और न ही कोई साइन बोर्ड या चेतावनी वाला बोर्ड लगाया गया था। इस पर भी गौर किया कि टैंक को एक साधारण से पत्थर की पटिया से ढक कर रखा गया था, जबकि वहां ताले वाली लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए थी। इन सब बातों से पहली नजर में केस में गैरइरादतन हत्या के आरोप के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। कोर्ट ने सीएफएसएल रिपोर्ट पर भरोसा जताया, जिसके मुताबिक टैंक के आंशिक रूप से खुले होने पर भी उसमें आसानी से कोई बच्चा गिर सकता था।
कोर्ट ने इन सब बातों पर गौर करने के बाद माना कि मामले में स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर फ्रांसिस थॉमस, प्रिंसिपल संध्या साबू और मृतक बच्चे की क्लास टीचर मीनाक्षी कपूर समेत अन्य तीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 पार्ट 2 के तहत गैरइरादतन हत्या का मुकदमा बनता है। केस को सेशन कोर्ट के पास ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे कानूनी प्रक्रिया के तहत इन लोगों के खिलाफ सही ढंग से आरोप तय किए जा सकें।
30 जनवरी, 2016 को देवांश नाम का 6 साल का बच्चा क्लास से गुम हो गया था। दोपहर 1 बजे इलेक्ट्रिशन को एम्फीथिएटर के पास लगे वॉटर पंप में उसका शव मिला। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मरा हुआ लाए जाने की बात कही थी। जांच के बाद पुलिस ने मामले में स्कूल के ट्रस्टी फ्रांसिस थॉमस समेत 6 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा-304ए के आरोप में चार्जशीट दायर की।
थॉमस समेत स्कूल प्रिंसिपल और क्लास टीचर ने कोर्ट में अर्जी दायर कर मामले में बरी किए जाने की गुहार लगाई। कोर्ट ने पाया कि सुनवाई के दौरान इन तीनों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए लापरवाही का आरोप एक दूसरे पर मढ़ने की कोशिश की।
2016 में वसंत कुंज स्थित रायन इंटरनैशनल स्कूल में 6 साल के एक बच्चे की मौत के मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और 5 अन्य को दिल्ली की एक अदालत ने गैरइरादतन हत्या का आरोपी माना है जिसमें 10 साल जेल की सजा हो सकती है। जनवरी 2016 में देवांश नाम के बच्चे की स्कूल के वॉटर टैंक में डूबने से मौत हो गई थी। मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अंबिका सिंह ने केस के तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करते हुए कहा कि स्कूल के अंदर वॉटर टैंक था, जहां बच्चे आसानी से पहुंच सकते थे।
टैंक के आसपास किसी को तैनात नहीं किया गया था और न ही कोई साइन बोर्ड या चेतावनी वाला बोर्ड लगाया गया था। इस पर भी गौर किया कि टैंक को एक साधारण से पत्थर की पटिया से ढक कर रखा गया था, जबकि वहां ताले वाली लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए थी। इन सब बातों से पहली नजर में केस में गैरइरादतन हत्या के आरोप के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। कोर्ट ने सीएफएसएल रिपोर्ट पर भरोसा जताया, जिसके मुताबिक टैंक के आंशिक रूप से खुले होने पर भी उसमें आसानी से कोई बच्चा गिर सकता था।
कोर्ट ने इन सब बातों पर गौर करने के बाद माना कि मामले में स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर फ्रांसिस थॉमस, प्रिंसिपल संध्या साबू और मृतक बच्चे की क्लास टीचर मीनाक्षी कपूर समेत अन्य तीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 पार्ट 2 के तहत गैरइरादतन हत्या का मुकदमा बनता है। केस को सेशन कोर्ट के पास ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे कानूनी प्रक्रिया के तहत इन लोगों के खिलाफ सही ढंग से आरोप तय किए जा सकें।
30 जनवरी, 2016 को देवांश नाम का 6 साल का बच्चा क्लास से गुम हो गया था। दोपहर 1 बजे इलेक्ट्रिशन को एम्फीथिएटर के पास लगे वॉटर पंप में उसका शव मिला। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मरा हुआ लाए जाने की बात कही थी। जांच के बाद पुलिस ने मामले में स्कूल के ट्रस्टी फ्रांसिस थॉमस समेत 6 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा-304ए के आरोप में चार्जशीट दायर की।
थॉमस समेत स्कूल प्रिंसिपल और क्लास टीचर ने कोर्ट में अर्जी दायर कर मामले में बरी किए जाने की गुहार लगाई। कोर्ट ने पाया कि सुनवाई के दौरान इन तीनों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए लापरवाही का आरोप एक दूसरे पर मढ़ने की कोशिश की।
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